प्रीतम-प्यारी दीखै शुक सारि।

प्रीतम-प्यारी दीखै शुक सारि।
छिटक परयौ सैंदुर नासिका,जई पिय टीकौ माँग सँवारि।
अंगुरि कौर हटावत जबई,फैराय दीयौ ओर नासिका प्यारी।
शुक चंचु सी दैवे दिखाई,हसै पिय कहकै प्यारी सारि।
दर्पण देखि हसी अतिहि,पाछे मुख फैरके मान दिखारी।
मनावत पिय चिबुक पलौटत,घसत रंगी आप नासिका प्यारी।
अरूण भई जोरि नासिका,दीखै ज्यौ हो शुक-सारि।
खेल अनोखे खेलत लाडले,जाई कै जोरि "प्यारी" बलिहारी।

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