बसूं श्री जमुना जी कौ तीर

बसू श्री जमुना जी कौ तीर।
हा राधा-माधव हा किशोरी,टेरू नित ह्यै अधीर।
अहौ मोरै स्वामी जु स्वामिनी,रटू बहा दृग नीर।
कछु किजौ कृपा कौर ह्यौ,अब तौ गमावत धीर।
"प्यारी" मग कोउ न दीखै,मेटौ तुमही या पीर।

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