युगल शोभा
युगल शोभा
देखि युगल शोभा अनूप।
नैन सैन साजत रतनारे,मृग खग सम लागत नीके।
अधर सरस रस पीक सौ भरे,हरत बरबस जी के।
गल पडी माल पुष्पन बडी भारी,गुथे पुष्प भाँति भाँति के।
अंग शोभा बरनि न जाय,कोटि काम लजावत फीके।
सटे परस्पर अंग सुअंगे,राजत हिय हमहि के।
प्यारी राधिका संग ला
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