बिछोडे काय
बिछौडे काय
बिछोडै काय करिहै पिय म्हारै।
ज्यौ स्वाति बिनु चातक मरिहै,त्यौ तडपू बिनु पी।
मछरी पानी सूख्यौ तडप्यौ,बिनु पीय तडपै जी।
हाय! नाय आयौ प्रीतम म्हारौ,सुनत एक नाय भी।
अखियाँ दरसन प्यासी होहिहै,ज्यो रेती बूंद पडी।
बिरह अगन भी मै तो गमाई,रही सूनी अज ही।
औ साँवरियाँ नंदलाल हमारै,प्यारी दरस देवो कद सी।
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