लली आशीष पद

(प्रत्येक सखी ह्रदय अभिलाषा अथवा एक ऐसी सेवाभाव स्थिति जँहा अत्यंत प्रेम से अपने सेव्य की मंगल कामना हेतु आशीष........है न अद्भुत.......)
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लली तैरो अविचल रहै सुहाग।
रस सुरति में रह्यौ रंगमगै,लगी रहै सदा प्रेम उर लाग।
रहै सदा प्रीतम अंक विराजी,निभृत मे रह्यौ प्रीतम संग साथ।
चंद्र टरै,टरै भानु तारै,टरै नाय बेंदी लगी तेरे माथ।
नव-नव भाँति लाड़ लडावै,लडावै पिय मिलिकै सखिन समाज।
शीश दैवे ओट करि घूंघटकै,"प्यारी" लैवे तारि बलाएं आज।

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