सुकुमार अतिही रंगीलै।
पलकनि झुकन उठन थकि जावै,बोल बोलनि श्रमित छबीलै।
कुसुमनि भूषण बसन भार सौ,ऐसौ वपु सरस रसीलै।
सुरति करै स्वेद अंग झलकै,तऊ मानै नाही हठिलै।
"प्यारी" कुसुम प्रेम के दोऊ,न्यारै सबसौ अति गर्बिलै।

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