काय डरै रे मनवा बौरे
काय डरै रे मनवा बौरे,सौ तो प्रीतम प्यारा। भलौ बुरौ चहै जौन होइयै,सोई मन प्राण हमारा।
कहन सुनन चलै प्रीती प्रेम की,कदि रार रस खारा।इन्हु तौ जानौ प्रेम रंग ,ज्यौ सतरंगी नभ वारा।
प्रेम भीती ना संग समायै,ज्यूँ पावक जल धारा।निरभै ह्यै या गली आइए,ह्यै करिकै मतवारा।
अरी फूंक झोपडी हाथ तपाए,वोई आय इस द्वारा।"प्यारी" शीश हाथ लै मोल लगाए,सोई इस जाननहारा।
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