बीत गयो री फागुन सुनो

बीत गयौ जी फागनसूनौ,बीती सूनी उमरिया रे,हाय मेरौ!आयौ ना साँवरिया रे।
रंग सुरंगै चढै नाय तबतै,चढ्यौ जबतै काजरिया रे ! हाय मेरौ०
कोउ चढि जए तउ नैन धोई दैवे,तौसो भरि यौ नजरिया रे ! हाय मेरौ०
बोले बोल जग जानै ना प्रीति,टोकै आठौ ह्यौ पहरिया रे ! हाय मेरौ०
लई जावौ "प्यारी" प्रेम राज जी,म्हारी थारी ना नगरिया जे ! हाय मेरौ०....

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