जोई मिलावै रमण सौ,चालू पथ सोई।
होवे अगन कौ या कंटक भरयोई,मिलै दरिया डूबिकै तौ,पल सोचू क्योई।
मीठी छाम हौ या जेठ दुपहरी,घन बरसै गरजै या,द्युति नभ होई।
शीश कटै मिलै धर कर उपर,कुल-नाशी कहाय मिलै,जानू सस्तोई।
जग सौ हटिकै या सुनिकै ताने,मिलै माटी होय तऊ,तजू देह योई।
हसिकै रोईकै या मानिकै रुठिकै,जेसौ"प्यारी" पिय मिलनौ हो,दीजौ राह वोई।
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