पिय प्यारी कौ सुख सखी

पिय प्यारी कौ सुख सखी नेम-बरत।
तिरथ कुंज निकुंज पद इनके,माला भजन दोउ की सुखमय टहल करत।
बतिया रस इनकी सद्-सतसंग,होम हवन प्रेम को केलि सेज रचत।
ध्यान योग इन लीला दर्शन,भए आरत स्तुति गान रंग बरनत।
वर मोक्ष दोउतै एकई देखन,पुन दान मिलन हित इनके खेल खेलत।
नेम बरत "प्यारी" अबतौ येई,सुख पिय प्यारी कौ सुखसै एक हौवत।

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