दैखे नवल किशोर किशोरी,
दैखे नवल किशोर किशोरी,औंधे पुलिन यमुन रज पौढे।
कर दिये कालिंदी भीतर,बिछाय पट वारि रहे जो ओढै।
कान कुसुमनि तारै परस्पर,बिछे पट रहै बिछाय सब तोडे।
तारे धरै निरखै रंगीलै,रहै पुनि नैन नैन सौ जोडे।
कर पतवार पट बहाये,दुरि जाय देखि दोउ हसै मुस्काए।
खेल प्रेम को न्यारोई,"प्यारी" यह निरखै ओर च्यो भाए।
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