भौरई बैठे झूले

भौरई बैठे झूलै लाल लली।
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अंग-अंग भरे रंग आरस भारी,झौके हितई मिठी पौन चली।
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अणु-अणु सल परै प्यारी सारी,पिय पटकौ गिनी जाय नही।
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सर-सर सर सौ सरकी चूनर,कुसुमनि माल गल उलझी गई।
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खिल-खिल खिलै दोउ फूल रंगीलै,सुकुमार जोरि ज्योई हँसी दई।
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नवी-नवी चौप उठी अंतर न्यारी,पुनिही नवे "प्यारी" दरस चही।

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