मुदित मन अंतर मुस्काए
मुदित मन अंतर मुस्काए,सखी मै आजु मेरे पिय पाए।
खिलि कुमुदनि सी मुख आभा,छिपै न कोउ भाति छिपाए।
हाय निगोरी लाज ने घेरी,नैन उठै नाय गिरी गिरी जाए।
तबही पिय कर पकरि चिबुक ली,पाछै भयौ कहा कौन बताए।
जई "प्यारी" दुलारी दुलराई उन,ऐ हे विधना प्राण योई जाए।
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