ठहरे हुए पानी मे आज कोई

ठहरे हुए पानी मे फिर पत्थर कोई गिरा गया
कि आज फिर बेहद मुझे मुझमे वो याद आ गया.....
,

पैबंद लगी जिंदगी मे कही फिर हवा पार हुई
फिर से कोई सुराख इक इसमे नया बना गया......
,

हर बार की तरह से फिर समेटने बैठै है हम
हर बार की तरह से फिर एक नज्म मे समा गया.....
,

अक्सर है होता ही यही "प्यारी" हालात इश्क मे
पत्थर खुदा वो जी गये हमे जीती शिला बना गया......

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया