बनै पिय
बनै पिय जर्जर अति नारी।
कटि दोहरी टैके लकुटी,चलै डगमग से पग धारि।
केश धवल अंगनि सिकुडै,धँसी गए कपोल दुई भारी।
पूछी बात सखिन इनसौ,माल चहै देन भानु दुलारी।
झुकी बैठी लली अवनि,पिय माल लली उर डारी।
जानी बात हसी देखी,प्यारी पिय लए कंठ लगारी।
भेद खुलै पियकै सारे,"प्यारी" हसे दे दे मुख सारी।
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