अधम बिसरात

अधम बिसरात

काहे दीन्ही अधम बिसरात।
सुनत हू कितने अधमी तारे,मम बारी भयी का बात।
गज गणिका अजामिल तारे,मेरौ काहे न जावे रात।
हम तो हे माधौ तरन न च्हावे,मोकू दीजियो सेवा साथ।
इतनो भी नाय देय सको तो,पिय दीखे सदा प्रिया साथ।
हे माधो प्यारी बिनती सुनियो,दीखे गल बहिया डारौ हाथ।

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