अखियन म्हारी भई बाँवरी
अखियन म्हारी भई बांवरी,तकि तकि मारग रमण तिहारौ।
इन्हु दोष कहा दीजौ बताय,कौन करनी इन फलिहै बिचारौ।
रसना इन्हु नाय दई विधाता,इन्हु भाग दए पहिलै बिगारौ।
रही-सही तौ सुनिकै-ना असुवन,घाम दए मनौ नौन बिखारौ।
बहौत भई पिय अबहु अबेरी,"प्यारी" टेर सुनिकै अईहौ प्यारौ।
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