जाको करनी जोई सोई
जाकौ करनी जोई सोई करिलै,मैं तो रमण दीवानी भई सौ भई।
रोकि मारग मिटा पथ देखिलै,करो बंद एकौ खोलै दूनि दूनि पिय मोहि।
रूठै लख नाय कोटि बेर जगहि,रूठै पिय जासौ सपनेहु करू काज क्योई।
सरै जग बिनु उन नाय सरिहै,जाकौ चलनौ बनै संग चालौ मेरे वोई।
डूबि अँसुन नदी राह बनिहै,तजि राजी-रजा कौ चाह आवौ सोई।
प्रेम करि "प्यारी" धन ऐसौ पाई,लूटै छीनै धन जग ज्योई बाढिहै त्योई।
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