हम गैया तुम ग्वाले
हम गैय्या ,तुम ग्वालै।
खोयी गयी घन वन मे अति भीतर,निकरौ ना जावै निकालै।
अति हाँक लगात रंभात प्राण तै,घिरै दुख मेघन कालै।
डरी भाजत इत्त उत्त ठौर न पावत,कोउ ना आय सम्हालै।
धम्म गिरी धरणी थकि हारि बिचारी,बहै बस नैननि नालै।
ह्यौ अब टेरौ प्रभु मुरली लेय हेरौ,उर नैनन हटावौ जालै।
"प्यारी" निज गैय्या रखियौ निज छैय्या,दीजियौ ना राज निकालै।
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