प्रीतम प्यारा मोहै
प्रीतम प्यारा मौहे लै चालो निज देस।
देस बिदेस ओर च्यौ रहवू,म्हारै पि जई जग कौ सुरेस।
बैनन झूठै तै इनकै भलै है,प्यारै मौन थारे चाहै हमेस।
साँची राँची रंग थारै पि जी,रंग दीजौ कछु हो तो शेस।
बिनती पुकारि सुनि लौ "प्यारी", लए चालौ छुडा झूठौ भेस।
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