का सो कहूँ

का सो कहू

का सौ कहू पीर तुम बिन राधे।
जगहु सुपना आप लागौ अपुना,आप बिना कोउ नाही सुनिहे राधे।
आप अती भोरी रस को पोरी,हमहु अधम नीच जनमा को राधे।
पुनि उठाहिहै पुनि हम गिरिहै,आपु ना छोडत कर मोरा राधे।
चरण चाह कब हिय जगिहै,कबहु टहल मोहे मिलिहै राधे।

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