खैच लयी लाल लली चुनरी
खैच लयी लाल लली चुनरी।
एक ओरि लाल लली एक ओरि,गुलाब कौ पौध बीच लगरि।
डारि प्यारी घूंघट पिय तरसा दई,आकुल पिय खैचे प्यारी भज-दी।
उलझी जई झाडी खैच लई प्यारौ,लजा प्यारी रही सिमटी सी खरी।
झौरे आय पिय प्रीत सौ औढाई,मिलाए नैन प्यारी मुस्काए परी।
भरै भुज परै डूबै रस सिँधु,दरश करी "प्यारी" चरण परी।
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