निर्मोही न बनियों

निर्मोहि न बनियो

साँवरौ निर्मोही ना बनियौ।
हू करा औगुन तजियौ नाय,औगुन चित्त ना धरियौ।
मारीयो रौदियौ चरनन मौय,चित्त सो ना जईयौ।
जित्त राखो तित संगै रहियौ,करि दूसर नाय गहियौ।
बिरह अगन चाहै जितनौ जरईयौ,पल कबहु आय मिलियौ।
हौ म्हारौ गिरधर नागर प्यारौ,प्यारी कबहु तो मिलियौ।

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