बिछा पट पिय नै सेज रचाई
बिछा पट पिय नै सेज रचाई।
भूमि बिछावनी कर पितांबर,भाँति बहु पुष्पनि सौ-दी सजाई।
सिमटी सकुची बैठी किशोरी,लिन्हे पद पिय नै गोद मे उठाई।
टीस सेवन सौ उठे अंतर मे,तऊ पिय मोद सौ भरि मुस्काई।
जई झनकानि सुनि नुपुर को,मोहित भए मोहन जग के साई।
शिथिल अंगनि भरे स्वेदा सौ,संभारि प्यारी लिन्हे उर तै लगाई।
नवल रंगीले प्रीतम प्यारी,"प्यारी" गावै प्रेम सुख इनको सदाई।
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