सेवा दान

सेवा दान
सखी सौ मांगे सेवा दान।
रैन भई दूध बीरी लेत,पूछी सखिन सौ रही जावती।
कहिहौ सखी किरपा जौ करिहै,अजहु सेबा हमहु करती।
नाही तौ कहत उहा नाही कोई,स्वीकृती सखीन सो पावती।
पहौची निकुंज माही जबहि,देखि युगल जौरी आलिंगन बंधती।
सैज बंधे एक हुहि बैठिहै,ऐसेहु बंध्यौ दुई सेजा लौटती।
हिय समायी लली लाल कौ,मुखा हिय लाल माही गढाती।
लली ऐकेहु कर कटि धरिहै,अरू ऐकेहु कर हियही धराती।
लाल धरिहै शीश कर राधिके,दूसरमा लाल कटिहु पकराती।
युगल प्रीत ऐसो दरस करिहै,प्यारी बार बार बलि जाती।

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