जुल्म कियो कैसो

जुलम कियौ
नंदलाल जुलम कियौ री।
नैन मिलाय आयौ नाही,मोहै छाँडी कियै बाँवरी।
मन मटुकी फोरी मौरी,दधि हिय सारी बिखारी।
फिरू बिरहन मारी मारी,लौग कहवै मोय बिचारी।
सूधौ चित्त चुरायौ मैरौ,टेढो साँवरौ गिरधारी।
लूट सबै नेक हैरे नाय,छाडी फिरन दर दर मारी।
हाय! बैरी कौन बैर निकारौ,काय सुध लैवे नाही प्यारी।

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