आवो जी रमण आवो जी

आवौ जी , रमण आवौ जी , लागै ना तौ बिन जिया।
दिखावौ जी,दरस दिखावौ जी,मानै ना दृग बिन पिया।
...थारी मुस्कनिया,उर बसि गईया,
मुस्कावौ जी,नेक मुस्कावौ जी,देखि उर खिल जइया।
....नुपुर झन,बजै मौरे श्रवणन,
सुनावौ जी,अब सुनावौ जी,तान निज सुना दईया।
.... बंकिम खडै,मौते गाढै गढै,
बसि-जावौ जी,बसि-जावौ जी,परि कै कहू पईय्या।
.....अबेरी भई,आनि सुनिही नही,
धावौ जी,बेगि धावौ जी,बेगि "प्यारी" लई जईया।

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