बिरह पीर सौं दर्द न दूजा
बिरह पीर सौ दरद ना दूजा।
उर लगै जोई जानिए सोई,पल पल कटै जुग सौ रोता।
औषध कोउ ना लगिहै यापै,लागै बैद्य कोउ ना कोउ ओझा।
दिनु दिन बाढै घटिहै ना कबहु,नैन जल सौ फलै बढै पौधा।
कहै कैसो अरू सहै कैसो,भारी संग लए घौमे उर बौझा।
जग तारन-हारै तारौ भारहु,"प्यारी" बिरह नाय तारि सकै दूजा।
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