काय बनतौ न
काय बहतौ न
रैन दिना काय बहतौ न नैना।
काय पाथर मन मैला टोला,काय न द्रव सम हुई बहि जाय।
ज्यौ धौली चदरी कारा दागा,त्यौ मन बिषयन काय भटकाय।
नैनन जल कहौ कहा भजि जायौ,काय नैनन सूख्यौ ह्यै जाय।
अधीर होय नाम टैरिहै न काय,काय नाहि चरणा शीश झुकाय।
गठरी बोझ जग झंझट ढोवै,काय नाय प्यारी प्यारौ मनाय।
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