माई री! मै तौ प्रेम की हाट बिकी।
बन्यौ खरिदार आयौ ब्रज कौ ठाकुर,ताई री! मौ पै वाकी नजरिया टीकी।
मिलै नैननि द्वौ नैन मैरे वाकै,कहू री! कहा तऊ मौरे मन पै लगी।
मै ही बिकी अरू मौल दी मै ही,हाय री! ऐसी बिक्री कबहु ना सुनी।
बेची सरबस "प्यारी" उन कर दीन्ही,अब री! जग देवन कौ माटी बची।
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