कहू कहा हिय दशा पिय तबकी।

कहू कहा हिय दशा पिय तबकी। 
रीझत लाडिली धरई दीन्ही,कर उर पिय कै जबकी।
दीखत कनक श्यामल तनपै,घटी भूषण आभा पिय कै सबकी।
उमग्यौ प्रेम शिथिल अंगनि,पिय कहि ना सकै अंतर-की।
"प्यारी" वैसे कहत बनै ना,करि दरस जैसे रसवर-की।

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