कौर कृपा

कौर कृपा

श्यामा जौरि करिहौ कौर कृपा।
राखिहौ चरणरज धूरि करिहै,दीजिहौ टहल निज कुंजन सदा।
दासिन तौ सौ करिहै राखौ,राखिहौ दासिन लौ दासिन बना।
श्वास श्वास लौ टहल न करैहु,करैहु टहल तबहु श्वास लैहा।
एकहु धुरि मम आस श्वास कौ,जुगल तौरि कहिए जहिहौ कहा।
कर जौरि बिनती जौरि तौ सौ,दीजौ चरण रति दासी कौ सदा।

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