जयजय श्यामाश्याम
जय जय श्यामाश्याम
भज मन जय जय श्यामाश्याम।
ताहि जपै आराम होहिहै,मिलिहै परम बिश्राम।
चरण कमल रति या सौ पाहिहै,गहिहै चरणन धाम।
देह दूजी देह आनंद पाहिहै,रटै प्यारौ कौ नाम।
पल छिन मोद बढत है जईऐ,च्यौ दुखन कौ कोउ काम।
बिष बिषय हटै रति प्रीत पाईहै,निरत करिहै जिव्हा नामी नाम।
ऐ रे मना भज पिय प्यारी नाम कौ,रट नाम परम सुखधाम।
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