अनुपम जोरि
अनुपम जोरि
राधावल्लभ अनुपम जोरी।
चतुर सुजान मोहन प्यारौ,राधा रसिली भौरी।
बाँकी चितवनी श्याम सुन्दर कौ,भरी प्रेम रति रस की पौरी।
फिरत भ्रमर सौ सखिन पाछे,राधै कमल कुसुम सम गौरी।
ऐकौ लकुटी टेढो हुई जानौ,एकौ भई रेशम कौ डौरी।
प्रेम तागा बांधै प्यारी दोउन,सुनो अजहु बिनती मौरी।
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