जिय कैसो धीर धराउँ
जिय ! कैसो धीर धराऊ।
हाय ! जिय कैसो धीर धराऊ।
बिनु पिय मछरी प्यासी तडफू,जीवू नाही मरी नही पाऊ।
छबी दिखै धुंधली आध अधूरी,भगै छूवन कर ज्यो बढाऊ।
आस लता सूख्यी जावै अबतौ,खारै जलसौ कद लौ बचाऊ।
तडफ मरू नाम रमणहु बिगरै,करू कहा यापै आँच ना लाऊ।
अरज करै "प्यारी" हरलौ सुधिही,सुधि खोइकै जग रह जाऊ।
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