बड़भागिनी गोपी
बडभागिन गोपी
गोपिन उही है बडभागिन।
लाल जाके गेह निज माखन चुरावै,आपहु खावै सखा वानर खिलावै।
जाकी माट फौरै उहि है भागवान,जाके गह बिखेरै दधि माखन गिरावै।
भाजे पाछे जोई पकरत या कू,झूठौ ही थकत झूठौ मुँहा बनावै।
हाय! बलि जावै जोई बा छबि पै,जबहि आवत देखि लाल डरि जावै।
जाकी चोटिन भरतार सौ बाँधे है,जाकी खाट ठाय माट दूरि सरकावै।
छिपिहै सुनिहै सब बातन लालजु,जौई ऐसौ काहै माई चुगली लगावै।
जौ जानू उतौ इहा ही छिपिहै,हिय कौ बैन काहू सौ न कहावै।
अरी री सखी तौरी सबही जानू,मोय चोरी हितहु फसानौ च्हावै।
अहा! बडभागिन गोपिन ऐसेहु,हिय चरणन ही रज बनौ च्हावै
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