अर्ज सुनो

अरज सुनौ म्हारी गिरधारी जी।
कबहु तौ लिजौ बुला ब्रज मोहे,दीजौ खोलि भाग पिटारी जी।
नैन लडावू कदि मै भी तौसो,तोपै जावू वारी बलिहारी जी।
कहन सुनन मन की कछु करिलू,लिपट रौवू चरणनि थारै जी।
माखन सौ कोमल मन वारे रमणा,निठुर भए काहै म्हारी बारी जी।
हारै जे नैना रोए रोए म्हारे,हारी ह्यौ तौ तोहे पुकारी जी।
अबेर भई अब आवौ जी लैवन,मेटो पीर बिरहा "प्यारी" की।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया