मौ सम अधम
मौ सम अधम
मौ सम अधम कुटिलहु कौन।
रसहु पावती झूठैहु मानती।
रसहु गयौ तबै रौवनो जानती।
आस बिस्वास दृढ नाहि होहि।
तबहि अधमन कोई रस खौई।
नैन दीखे नाही सचहु मानिहै।
पावत मधुर रस कौतुक जानिहै।
जबहि गयौ सबहि बिगारी।
दोष आपनो नाहि बिचारी।
कृपा करिहौ हे जुगल प्यारी पे।
रसमय रहिहौ रस मोहि दे।
मिलिहौ सबै रस तोहि प्यारौ।
दासी कौ बस निमित्त बनावौ
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