दृग सम मीन

दृग सम मीन प्यारौ रमणा के।
परम नुकीलै शर सब शर सौ,पैने अति तीर कारौ रमणा के।
सुरत सरस रस सिंधु तैरत,जौरे दोउ मीन श्वेत बरणा के।
लगै उर "प्यारी" जानी जे तबई,छोटे मीठे तऊ गाढै लगना जे।

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