प्रियाजु किन सौं सीखों तुम रूठन

प्रिया जु ! किन सौं सीखौं तुम रूठन ।
तुम्हीं तो मेरी प्राण प्रिया हौं , तड़पत जिय न लागै मूठन ।
हा हा करूँ परूँ तेरी पैयाँ , अब  छाड़ि देओ रिस झूठन ।
प्रिया किशोरी मुस्काय के दिखाबो, मुख माधुर्य अनूठन ।

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