री लता पतानी
री लता पतानि बीच परै , दोऊ कुसुमनि मोद भरै।
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पुलकित अंगनि रस सौरभ सौ , घड़ी एक एकहु बडै स्वास भरै।
नभ स्वर्ण मणि मण्डित जेसौ , यौ अद्भुत स्वेदा श्रृंगार करै।
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अलसायै नयन थकै रस श्रम सौ , तऊ ओरि पीवन मनुहार करै।
लिपटै भूषण सौ एक दूजै , भुजहु गल भाति हार परै।
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"प्यारी" छबी कहै कैसो रसकी,बरणन हित इनसोई आस करै।
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