होली लीला

होली लीला
रंग भरि मारी पिचकारी,चोली चूनर भिगाई।
कुसुम कैसर जल घोल मिलाई
कनक पिचकरी जलै भराई
दई मोरी शोभा बिगारी।
दोडिहै पाछै मोरै आई
कसही पकरि मोरी कराई
नेक लाज न करिहै मुरारी।
हमहु लाज कौ पटा दई उघारी
दई नंदपूत को जी भर गारी
भर मूठ गुलाल कौ डारी।
लछण सबै कुलछण पायै
सखा लियौ संगै लम्पट आयै
सर सौ खैच लई सारी।
कस लई चुनर आ रै दारी कै
चढ्यौ उतारौ नशे होरी कै
सिखाय दउ खैलवै होरी।

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