अलबेली नार
अलबेली नार
अलबेली नार बनै श्यामसुन्दर।
लटक मटक चाल चलत,नाम धरै कलावती।
रूप अनूप काढि घूंघट,कुंज द्वार जती।
सखीन दुई चार संगै,संग लीला मिलाई।
मान धरै प्यारी राधिकै,लई आजु मनाई।
सुनौ सुकुमारी लली सुनिहै,मधुर गीत सुनाहै।
कलावती सप्त सुरै निपुणे,कहौ जौई सुनाहै।
सुनत ताल राग बताई,श्यामा सुनत लागी।
खोई ऐसेहु कलावती प्यारी,सुधि तन बैरागी।
घूंघट हटिहै भेद खुलिहै,श्यामा हस मुस्काई।
प्यारी लीला नेह लिखिहै,दरस कदसी पाई।
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