निरख लयी

निरख लयी जगमग रंग सदन।
सुरति किये अति प्रकाशित,निकसत आवै देहरी सौ उपवन।
कछु अंतर जान ढुरिहै,ढुरत लडै आपस भुज अंसन।
लडैति अडै अडत मुस्कावै,आरस भरै डगमग चलै कुंजन।
रस प्रकाशित जोरि रसीली,सदाई गावै "प्यारी" इन दरशन।

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