श्याम बाँवरो
श्याम बाँवरौ
मुस्काय देखि जबसौ राधे,सुधि बुधि खोय भयौ श्याम बाँवरौ।
हसि निरखि कौर जबसौ,काजल रेखि बन नैन समायौ।
करत करत झूठौ सौ काजौ,दौडि जाय बरसानौ आयौ।
जहा तहा गोपिन पकरि कौ,पूछै राधे कबहु आय बतायौ।
कैसौ रूप ठगौरि डारि,राधे कैसौ मोहन आप गवायौ।
बाँवरि जो करै सबन कू,सौई गौरि नैनहु निकरि न पायौ।
रसिलिहै दुई बाण सौ नैना,हिय धंसै जाई नाहि निकारौ।
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