पीयू पपीहा टेरे
पियू पपिहा टेरे
पियू पियू काय पपिहै टेरे,गयो पिय का तज तौहै...
....तू मम सम बिरहाकुल...
नाय भावै महला मोय,नाय पिया झूठ्यौ।
साँचौ पिय मौरा सुध नाय लैवे,बैठ्यौ काय रूठ्यौ।
तौहै पियू की जाद सतावै तबहि तू टेरे....तू मम सम बिरहाकुल....
कौउ नाय सुनवै वारौ,कौन सौ जाय कहवू।
इकली बैठी रौवत हौहू,नाय पिय बिनू रहवू।
तू भी पपिहा भौरे औ रे इकला ही टेरे....तू मम सम बिरहाकुल.....
प्राण अधर लटक्यौ मौरे,निकरे रहवै बनत नाय।
थाकी बिनती करत करत हौ,पडत पडत या कौ पाय।
तैने भी प्रेम बिरहा पाया तबहि रो टेरे.....तू मम सम बिरहाकुल....
तू मम सम....
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