माई मोहै राधारमण भावै

माई मौहे राधारमण भावै।
घन सम रूप अनूप माधुरी,तीखै नैनन सैन चलावै।
कटीली कटि टेढी सी लकुटि,खडा पग टेढा सा ललचावै।
बंशी अधर सजी मारै मोहिनी,अंग अंग अमृत छलकावै।
अरी माय मैरो तो सरबस वोई,दूजा उर नैनन नाय आवै।

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