जानि अली पिय घर

जानि अलि बनै पिय घर आए।
नैन लगाए बैठी रही द्वारै,करि गुन-गुन झरौखे पधराए।
आवै मंडरावै जावै पुनि आवै,पिय बोले नाही चुप समुझाए।
जानू सबई अजमावत मौहे,दैखे लैवे या ना लैवे पिछनाए।
मुस्काई जानिकै बात पियकी,"प्यारी" रोई जई गए पि दुराए।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया