प्रेम अगन जो बोई
प्रेम अगन ज्यो बोई उरहु,करि निज हाथन अपघात सखी।
नैन निगोड़े अब रोवै करनी,तब नाय मानै छबी बिनहु लखी।
जानत जोई ऐसौ हौवे सखी री,जाती नैन मूंदै उनसौ बची।
होवै अब कहा कोऊ उपाय,हांडी काठ चूल्है अब तो चढ़ी।
जलन तपन तब-लौ होय अब तो,"प्यारी" जब-लौ होय राख नहीं।
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जलन तपन तब-लौ होय अब तो,"प्यारी" जब-लौ होय राख नहीं।
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