विधना बैर
विधना बैर
विधना काय बैर परयौ मौ सौ।
जाद डस्यै खोल फनै भुजंग सौ,बिधना भी बैर करै।
आवै तरस नाय काय बिरहन पै,नैन खारौ जल सौ ही भरै।
आप सौ भगि कितहु जावू,बिरहा लग्यौ पाछै परै।
हाय रोग कौन श्याम कौ पायौ,कौउ बैद्य ना ढूंढ्यौ मिलै।
लेख लिख दिन्है कैसौ पियजी,नाय आवन सुननौ लिखै।
तिनकौ सम सूख्यौ तनहु,दीख्यौ कोउ कौ ना मनहु जरै।
पावू ना धीरज दसौ दिशि हौ,नाहि चित्तहु को ठौर मिलै।
तिल तिल जरत मरत रह्यौ प्यारी,प्यारौ कियै दासी चरण धरै
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